आखिर रतन टाटा ने किस तरह लिया फोर्ड कंपनी से बदला ……

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बात दरअसल यह है टाटा कंपनी ने जब इंडिका कार लांच किया था उस वक़्त भारतीय बाज़ार में इस नये मॉडल को पसंद नही  किया गया था | कंपनी ने एक ही वक़्त में बहुत सारी गाड़ियाँ बना ली थी| तब कंपनी ने एक फैसला लिया और रतन टाटा ने अमेरिकन कंपनी फोर्ड से बात की  और वो इसके लिए अमेरिका चले गये वे बड़े उम्मीद के साथ गये थे उन्हें लग रहा कि फोर्ड उनके कारों को खरीद  लेगा पर ऐसा नही हुआ  फोर्ड कंपनी ने उन्हें साफ मना कर दिया और यह कहा जिसे जानकार आप बिलकुल भी यकीन नही करेंगे | फोर्ड कम्पनी ने अपने बात में कहा अगर  आपको पैसेंजर कार बनाने नही आती तो आपको इस रास्ते में आगे नही बढना चाहिए | फोर्ड कंपनी के मालिक ने यहाँ तक कह दिया कि आप की कार खरीद  कर हम आप पर एहसान ही करेंगे  रतन टाटा उसी वक्त मिटिंग अधूरी छोड़ कर वापस आ गये वे पुरे रास्ते बिलकुल चुप थे लोगों को आश्चर्य हो रहा था की आखिर फोर्ड ने ऐसा क्यों किया |

बाकि लोग तो इस घटना को भूल चुके थे लेकिन रतन टाटा  जो दिन रात  अपने ब्रांड को आगे ले जाने की कसम खा ली उस वक्त भारत में ऑटोमोबाइल की बिज़नस इतनी  बिकसित नही हुई थी की वो दुनिया में अपने वजूद को आगे रख सके | रतन टाटा की कड़ी मेहनत ने इस परिभाषा को बदल कर रख दिया | और आज भारत ही नही बल्कि पूरी दुनिया में टाटा  ऑटोमोबाइल अपना परचम लहरा रहा है |

एक वक्त  ऐसा आया जब फोर्ड कंपनी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा उसके सारे शेयर गिर गये तब रतन टाटा ने फोर्ड जगुआर-लैंडरोवर (जेएलआर) खरीदने का फैसला किया और 2.3 अरब डॉलर (उस समय 9300 करोड़ रुपए) में अपने बदले को पूरा किया  | इतना ही नही उसने अपनी कड़ी मेहनत से बहुत ही जल्दी फोर्ड कंपनी को मुनाफे में ले आया ऐसा कर के उसने पुरे देश का नाम रोसन किया |

ratan tata

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